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*मां अंबे माइनिंग हादसे की अदालती जांच पर श्रम मंत्रालय लेगा निर्णय, DGMS ने भेजी रिपोर्ट

 

रजनी कुमारी चौहान की रिपोर्ट,,,, (अखंड भारत न्यूज़)

 

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धनबाद:बीसीसीएल के कतरास क्षेत्र अंतर्गत एकेडब्ल्यूएमसी परियोजना के मां अंबे आउटसोर्सिंग पैच में हुई खदान दुर्घटना को लेकर अब कोर्ट ऑफ इंक्वायरी की संभावना तेज हो गई है। खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) ने केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को अपनी प्राथमिक जांच रिपोर्ट सौंप दी है। तीन से अधिक लोगों की मौत होने पर अदालती जांच का निर्णय मंत्रालय स्तर से ही लिया जाता है।

DGMS सेंट्रल जोन के डिप्टी डायरेक्टर (माइंस) सुप्रियो चक्रवर्ती और उनकी टीम ने प्रारंभिक जांच में पाया कि हादसे की वजह *हाईवाल बेंच फेल्योर और हाल रोड का धंसना* रहा। इसके बाद रविवार से खनन कार्य पर रोक लगा दी गई है।

DGMS सूत्रों के मुताबिक कोर्ट ऑफ इंक्वायरी प्रक्रिया में जांच अधिकारी को सिविल कोर्ट जैसी शक्तियां मिलती हैं। वे गवाहों को बुला सकते हैं, दस्तावेजों की मांग कर सकते हैं। संबंधित पक्ष – श्रमिक, अधिकारी या परिजन – गवाहों से जिरह कर सकते हैं और अपने पक्ष में सबूत पेश कर सकते हैं। इससे पहले नगदा, गजलीटांड़, चासनाला (धनबाद) और ईसीएल राजमहल खदान हादसों की भी कोर्ट ऑफ इंक्वायरी हो चुकी है।

*कोल इंडिया चेयरमैन ने ली जानकारी*

मंगलवार को कोल इंडिया चेयरमैन पीएम प्रसाद ने दुर्घटना को लेकर जीएम (सेफ्टी) से विस्तृत जानकारी ली। उन्हें बताया गया कि हादसे में *कुल आठ लोगों की मौत हुई,* जिनमें छह आउटसोर्सिंग कर्मी शामिल थे। चेयरमैन ने खदान के भीतर बाहरी लोगों की मौजूदगी और सुरक्षा खामियों पर भी सवाल उठाए। इस दौरान जीएम सेफ्टी ने सुरक्षा व्यवस्था में चूक स्वीकार की।

*विपक्ष का हमला*

पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जब तक कोर्ट ऑफ इंक्वायरी नहीं होगी, तब तक पूरे मामले की सच्चाई सामने नहीं आ पाएगी। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

गिरिडीह के सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी ने घटना को दुखद बताते हुए कहा कि “रामकनाली कांटा पहाड़ी की इस दुर्घटना की सच्चाई कोर्ट ऑफ इंक्वायरी से ही सामने आएगी।” उन्होंने कहा कि वह इस विषय को सदन में भी उठाएंगे और मंत्रालय से मिलकर जांच की मांग रखेंगे।

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